AHSAN AAPKA
Friday, April 27, 2018
गुस्ताखियाँ
›
गुस्ताखियाँ अब माफ करो नाराजगी अब साफ करो कह न सकी है जो बातें जुबां, है अब कह रहे मेरे अल्फ़ाज शब्दो की है ये जो बात शब...
Saturday, September 23, 2017
›
इक पौधा नन्हा सा पौधा। था मेरे साथ जो बड़ा हुआ अपने नन्हे हाथो से मैंने जिसे बड़े जतन लगाया था। अपने बचपन में मेने भी एक पेड़ लगाया था ...
Monday, March 31, 2014
kya tumne kabhi ye dekha hai ?
›
क्या तुमने कभी ये देखा है , कैसे सुरज उगता है , कैसे बादल बरसते है , कैसे नदियाँ बहती है , ये हवा कहा से च...
Monday, November 12, 2012
kya sochta hai?
›
ऐ मेरे मन क्या सोचता है , क्यों आज तू इतना उदास है , क्यों आज तू इतना निराश है , क्या बात है , क्यों तू इतना हताश है , कौन सा मंजिल ...
Sunday, August 12, 2012
AHSAN AAPKA: अनकही बाते
›
AHSAN AAPKA: अनकही बाते
Thursday, July 22, 2010
अनकही बाते
›
मै मिलना चाहता हूँ , उन यादों से जिनमे बचपन की कुछ बाते हैं , कुछ यादें है कुछ वादें हैं अपने दोस्तों से अपने खेतो से अपने खलिहानों से जो कि...
1 comment:
मेरी पहली कविता
›
अपने बचपन के झुरमुट से लेकर आया हु , कुछ मीठे फल कुछ खटे फल बन बेरो के जैसे फल कुछ फ...
1 comment:
›
Home
View web version